झारखण्ड जाने के क्रम में वासुदेव उर्फ चेतलाल महतो, मैं और कृष्णा महतो। ये दोनों कुड़मी हैं। साथ में एक मुंडा भी थे। पता चला कि कृष्णा जी विंग कमांडर ज्ञानेंद्र सिंह के गाँव के हैं और एच. एन. सिंह को भी दोनों जानते हैं और JLKM पार्टी से जुड़े हैं। बात जनजातियों के रीति रिवाज पर उभरी। चेतलाल महतो ने कुड़मियों के किचन गार्डन के कांसेप्ट को समझाया। उनके अनुसार प्रत्येक कुड़मी परिवार में एक छोटा सा प्लाट रहेगा, जिसमें मुनगा/सहजन/drumstick, कुंदरू का लत्तर, प्याज, लहसुन, बकरी, मुर्गियाँ आदि जरूर रहेंगे। अन्य शाक सब्जी भी मौसम के अनुसार उगाए जाते हैं। कुँवा भी रहता है। यह सालों भर उनकी जरूरतों को पूरा करता है। वस्तुतः यह बिहार में भी कुर्मियों के खड़ के रूप में रहता था। कृष्णा जी ने बताया कि उनकी मैडम को 30 सालों से इन चीजों के लिए बाजार नहीं जाना पड़ा। पर, ये चीजें बिहार में बँटवारों के कारण समाप्त हो रही हैं। खेतों में मुख्यतः धान और गेहूँ उपजाया जाता है। जिससे बाकी सारी चीजें जैसे दाल, मसाला, तोरी, तीसी, प्याज, लहसुन, माँस, दूध सब खरीदना पड़ रहा है। यदि आप नेट क्रेता और नेट विक्रेता के नफे नुकसान को समझते हैं तो आप समझ सकते हैं कि कैसे किसान जातियाँ धीरे धीरे नुकसान में जा रही हैं। जो शादी, इलाज या पढ़ाई के दैरान खेत बेचने के रूप में दिखाई पड़ता है। खेती में यंत्रों की मदद लेना भी किसानों को नेट क्रेता हीं बनाता है। सरकार द्वारा लाये गए मुख्यतः इन दोनों फसलों के उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक से अधिक उपज यानी हरित क्रांति की देन है किसान जातियाँ इन दोनों फसलों के चक्कर मे पड़ीं। किसानों के लिए ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर मे पड़ना इन्हीं दोनों फसलों को अपनाना हुआ। इनकी अधिकता ने इनके मार्किट prices क्रैश कराए। दलहन तेलहन से हाथ खींचने के पीछे कुछ हाथ वन्य जीवों का रहा। यह सरकारी नीतियों का परिणाम था। उपरोक्त दोनों फसलों का मार्किट में दाम एमएसपी द्वारा निर्धारित होना सरकारी नीतियों का परिणाम है। 6% फसलों का एमएसपी पर सरकारी खरीद एक क्रिमिनालिटी है। जब सरकार स्वयं कहती है कि एमएसपी वह मूल्य है, जिसके नीचे फसलों की खरीद घाटे का सौदा है तो सरकार न केवल 6% फसलों को बिना लाभ दिए किसानों से खरीद रही है, वरन बाकी 94% फसलों के लिए मार्किट रेट तय कर रही है, जो एमएसपी से लगभग मामलों में नीचे ही रहती है।
आप समझ सकते हैं कि किसानी घाटे का सौदा क्यों है? और किचन गार्डन का कांसेप्ट किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्यों है? आपके पास जमीन नहीं है, छत पर उगाईये। हर वो उपाय कीजिये जिससे बाजार पर आपकी निर्भरता कम होती हो या कम से कम लेन देन में बीच में मुद्रा न आती हो। मुद्रा की पिवोटिंग हमलोगों के लिए अभिशाप है।
