Thursday, February 5, 2026

दृष्टिकोणों की विविधता

 3 जुलाई 2021 को फेसबुक पर लिखा लेख पुनर्प्रसारित

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संलग्न फ़ोटो एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में आया था। परिवार मे इसको दिखाके हमलोग खूब हँसे। हंसते हंसते आंखों से आँसू आ गए। फिर मैंने इसको अन्य व्हाट्सएप्प ग्रुप में शेयर किया। अधिकांश से कोई प्रतिक्रिया नही मिली। तीन ग्रुप में "यह सब क्या है" जैसी लोगों की प्रतिक्रिया थी। यानी किसी को भी यह मजेदार नही लगी या फिर मेरे अभी तक के छवि के कारण लोगों को इसका मतलब समझ नही आया, जिसको out of context मुहावरे से भी समझा जा सकता है। हालाँकि शेयर करने का उद्देश्य मजे लेना ही था, पर, यह फ़ोटो हँसाने के अलावा और भी बहुत कुछ कहता है।


आप देख सकते हैं कि कैसे पहले कबूतर के उदाहरण से पैटर्न समझा गया है कि बाकी अक्षर में बूतर लगाना चाहिए और फिर ख से खबूतर आदि हो गया है। आप हँस सकते हैं, क्योंकि आप अब जान गए हैं कि ख से खरहा आदि होना चाहिए था। आप लिखने वाले पर हँसे इसलिए कि आपको यह बचकाना लगा और आगे की पढ़ाई के लिए यह गलत है भी। 


पर, क्या आपने नोटिस किया कि दोनों दृष्टिकोण सही हैं। कई मामलों में आगे की गतिविधियों के लिए आप पिछले गतिविधि से पैटर्न ही तो ढूँढते हैं और यह भी वही चीज था। अनेकों मामलों में हमारा दृष्टिकोण एक से ज्यादा हो, ऐसा विरला ही है। 


यह स्थिति हमारे लिए सही भी है और गलत भी है। सही इस मायने में कि हमारे सीखने की प्रक्रिया को यह एक stable/स्थायी दिशा देता है। गलत इस मायने में कि दृष्टिकोणों की विविधता में कमी के कारण नई चीजों में सफलता का प्रतिशत बहुत कम रहता है।


यह सब मैं अपने पढ़ाने और पढ़ने के अनुभवों के आधार पर कह रहा हूँ। अगर आप सोचते हैं कि इस फोटो में जो किया गया है, यह सोच सामान्य नही है तो आप गलतफहमी में है। यह सोच बहुत ही सामान्य है और दैनिक जीवन मे आप भी इस मानसिकता का खूब प्रयोग करते हैं। कई बार मैं झुँझलाहट में अपने विद्यार्थियों को इस तरह की गलतियों पर झिडकता हूँ कि  "आपको 4 x 3 = 12 बता दिया जाएगा और फिर 5 x 6 पूछा जाएगा तो भी आप 12 ही कहेंगे? आपको गुना का प्रोसेस बताया जा रहा है न कि दो संख्यायों का गुना 12 होता है यह बताया जा रहा है?" कुछ लोगों के लिए मैं यहाँ पर स्पष्ट कर दूँ विद्यार्थियों द्वारा की गई गलती क, ख, ग या फिर 4 x 3 वाली नही होती, बल्कि गणित, विज्ञान के विषयों में कोई एक चीज बताने पर वे अन्य चीजों में भी वही बताई चीज को इस्तेमाल करने लगते हैं। यानी वे पैटर्न ढूँढते हैं। और इस पर मैं क्रोधित होकर ऊपर वाली झिड़की देता हूँ। तो आप समझ गए होंगे कि यह सामान्य है और किसी चीज को देखने का एक और दृष्टिकोण है।


हाइस्कूल में पढ़ने के दौरान एक बार भूगोल शिक्षक नक्शे पर उत्तर दक्षिण समझा रहे थे। नही समझ पाने की सजा चुतर पर दो बेंत लगा कर टेबल पर उत्तर की ओर मुँह करके लेटा कर दी गयी। मैं समझ नही पाया कि नक़्शे में उत्तर ऊपर की ओर ही क्यों है, जबकि उत्तर, पूर्व, पश्चिम तो ऊपर नीचे होता नही है। शिक्षक मेरे दृष्टिकोण को समझ नही पाए पर उसका खामियाजा भी मुझे ही भुगतना पड़ा। अब मुझे लगता है कि बहुत बार शिक्षक अलग अलग दृष्टिकोणों को समझते और विद्यार्थियों को उस हिसाब से बताते तो शिक्षा से अरुचि की आम समस्या हल की जा सकती थी।


एक बार बचपन मे मैं अपने मौसी के यहाँ गया था। बहन ने टोका की मैंने मोजा उल्टा पहन रखा है। मैं बार बार कभी उनकी ओर, कभी मोजे की ओर देख रहा था कि मोजे तो सही पहन रखे हैं। उल्टा का मतलब मोजे inside out पहनना, पर मैंने ठीक ही पहना था। मेरे आश्चर्य पर बाकी लोग बहुत हँसे। कुछ देर में उन्होंने बताया कि मैंने बाया वाला दाहिने में और दाहिने वाला बाएं में पहन रखा है। यह भी उल्टा ही हुआ। वस्तुतः शब्दों का टोटा होना हमारे भाषा की कमी है। हँसने वालों से चूक हुई कि वो मेरा दृष्टिकोण नही देख पाए और मुझसे चूक हुई कि मैं उनका दृष्टिकोण नही देख पाया।


इन उदाहरणों से अब आपको समझ मे आना चाहिए कि दृष्टिकोणों की विविधता को हमलोगों को स्वीकार करने की, बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके उलट वाले को ही लकीर का फ़क़ीर कहा जाता है। आप लोगों को out of box का मतलब भी समझ मे आना चाहिए कि क्यों context सेट हो जाने पर आप tunnel vision के शिकार हो जाते हैं।


फोटो के मजे लीजिए।