#लाइक_शेयर_और_सब्सक्राइब_जरूर_करें
पूरा पढ़ें, शेयर करें
1. हर जाति से परिष्कृत जागृत संस्कारक ही बदलाव ला पायेंगे। वे किसी भी स्थापित पद्धतियों के विधियों में समस्या देख पायेंगे चाहे वह पौराणिक हो, आर्य समाजी हो, गायत्री हो या बौद्ध या कोई भी अन्य पद्धति हो
2. संस्कारक और धर्म के मार्केट में अभी मोनोपोली है। यह लोगों के भावनात्मक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक शोषण का जरिया है। इसमें भागने के बजाय भाग लेने और आस्था के पुनः विकेंद्रीकरण की आवश्यकता है
3. कर्मकाण्ड सीख लेने और करवाने से पाखण्ड फैलता है, पर, पहले से फैले हुए को समेटने के लिए भी कर्मकाण्ड और संस्कार की पद्धतियाँ सीखनी समझनी पड़ेंगी
4. संस्कारक के क्षेत्र में एकाधिकार खत्म करना गेम चेंजर है
5. चर्चा का स्तर काफी ऊँचा है। नए लोग जुड़ रहे हैं। इसका मतलब नए लोगों तक मिशन का संदेश जा रहा है
6. मिशन से तैयार संस्कारक तर्क से बातों को परखने वाले, वैज्ञानिक सोच वाले तथा सूझ बूझ वाले होंगे
7. स्वप्रेरित टीम में संधारणीयता होती है। वह हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का संबल रखती है
8. आचार्य महेंद्र पटेल ने पौराणिक पद्धति से संस्कार करवाकर वहाँ उपस्थित जाति से पण्डित और समारोह में उपस्थित जनों का यह अवधारणा/भ्रम तोड़ दिया कि किसी अन्य जाति का संस्कारक सफलता पूर्वक संस्कार नही करवा सकता है
9. अक्सर लोग अपने ही लोगों या अपने ही जाति के लोगों द्वारा किसी कार्य मे पैर खींचने, ईर्ष्या करने, अड़ंगा डालने आदि की शिकायत करते हैं। उन्हें समूह का मनोविज्ञान समझने की जरूरत है कि यदि 10 में 9 लोग किसी एक दिशा में जा रहे हैं और 1 दूसरी दिशा में तो 9 लोग जिस चीज को सत्य समझते हैं, उनकी कोशिश रहेगी कि उस 1 को गलत दिशा में न जाने दें। चूँकि सत्य एक सापेक्षिक चीज है तो यह उस 1 की बहादुरी होगी कि अपने दिशा में कितने लंबे समय तक यात्रा जारी रख सकता है और साथ मे लोगों के मानस पर दस्तक देते रह सकता है (continuity & consistency)। समय के साथ साथ 9 मे से धीरे धीरे कुछ लोग उस 1 की बात में यदि दम/merit देखेंगे तो रंग बदलना शुरू करेंगे। इस मैकेनिज्म को समझे बिना सिर्फ पैर खींचने या अड़ंगा डालने जैसी ही शिकायत की जा सकती है। of course, कुछ फैक्टर्स इस प्रक्रिया को तेज या धीमा कर सकते हैं
10. गप्प करना एक प्रभावकारी सामाजिक तरीका है जो बातों को फैलाता है, किसी की छवि धूमिल कर सकता है, किसी की अच्छी कर सकता है, संस्कृति का निर्माण करता है, संस्कार तय कर सकता है, किसी मुद्दे, विचारधारा, बात, इतिहास, संस्कृति, संस्कार, आचरण आदि के बारे में आम राय बनाता है। इसमे गप्प का मैटेरियल उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो जाता है। ज्यादातर यह engineered होता है, पर, आम जन इसको घटना के रूप में देखता, सुनता, चर्चा करता, अपनाता या छोड़ता है।
धर्म, पाखण्ड आदि इसी तरीके से फैले। किसी बात को फैलाने के लिए बात को अनेकों प्लेटफार्म से अनेकों क्षेत्रों में लंबे समय के लिए (कम से कम 3 पीढ़ी/60-75 साल) चर्चा में रखना जरूरी है। इसके लिए सतत रूप से लोग, प्लेटफार्म और उस दिशा में सोचने वाले विचारक चाहिए, जिनके वृद्धि दर पर बात फैलना या सिमटना निर्भर करता है
11. यदि A, B की मदद करता है तो B ही मदद return करे, अभी समाज मे यह भावना है। B मदद लौटाने की परिस्थिति में नही भी हो सकता है और फिर A गप्प के माध्यम से न केवल B के बारे में बात फैलाता है बल्कि यह भी फैलाता है कि घोर कलयुग है, दूसरों की मदद करने का कोई फायदा नही है। यदि A, C या D की मदद को भी अपने द्वारा की गई मदद की भरपाई माने तो आपसी सहयोग का सतत सिलसिला कायम किया जा सकता है।
मानसिकता में यह अंतर किसी को मदद मिलने या देने की प्रायिकता/संभावना को घटा या बढ़ा सकता है। हालाँकि लेन देन में उच्च नीच हो सकता है।
12. समाज के हर परिवार में किसी भी विधा का एक संस्कारक होना चाहिए
13. आस्था का विकेंद्रीकरण जरूरी है। आस्था का केंद्रीकरण शोषण का हथियार है।
~ अनेकों विद्वान वक्ता
*देखिए* https://youtu.be/yb2vjCDue3A?si=_iCcWH00CQsmlt9m
*यूट्यूब2 पर पिछले बैठकों में विचारकों, समाजसुधारकों और संस्कारकों के उद्बोधन सुनने के लिए क्लिक करें* https://youtube.com/playlist?list=PL1ap5oFZycBOqlpUODvamqrjLhd9hrJTh&si=yj1a8qvj1zT-qSL4

