Tuesday, February 20, 2024

पुरोहिती में Monopoly, A Way of Exploitation; पैर खींचना, गप्प और मदद का मनोविज्ञान; 67th #PPSM P3

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1. हर जाति से परिष्कृत जागृत संस्कारक ही बदलाव ला पायेंगे। वे किसी भी स्थापित पद्धतियों के विधियों में समस्या देख पायेंगे चाहे वह पौराणिक हो, आर्य समाजी हो, गायत्री हो या बौद्ध या कोई भी अन्य पद्धति हो


2. संस्कारक और धर्म के मार्केट में अभी मोनोपोली है। यह लोगों के भावनात्मक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक शोषण का जरिया है। इसमें भागने के बजाय भाग लेने और आस्था के पुनः विकेंद्रीकरण की आवश्यकता है


3. कर्मकाण्ड सीख लेने और करवाने से पाखण्ड फैलता है, पर, पहले से फैले हुए को समेटने के लिए भी कर्मकाण्ड और संस्कार की पद्धतियाँ सीखनी समझनी पड़ेंगी


4. संस्कारक के क्षेत्र में एकाधिकार खत्म करना गेम चेंजर है


5. चर्चा का स्तर काफी ऊँचा है। नए लोग जुड़ रहे हैं। इसका मतलब नए लोगों तक मिशन का संदेश जा रहा है


6. मिशन से तैयार संस्कारक तर्क से बातों को परखने वाले, वैज्ञानिक सोच वाले तथा सूझ बूझ वाले होंगे


7. स्वप्रेरित टीम में संधारणीयता होती है। वह हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का संबल रखती है


8. आचार्य महेंद्र पटेल ने पौराणिक पद्धति से संस्कार करवाकर वहाँ उपस्थित जाति से पण्डित और समारोह में उपस्थित जनों का यह अवधारणा/भ्रम तोड़ दिया कि किसी अन्य जाति का संस्कारक सफलता पूर्वक संस्कार नही करवा सकता है


9. अक्सर लोग अपने ही लोगों या अपने ही जाति के लोगों द्वारा किसी कार्य मे पैर खींचने, ईर्ष्या करने, अड़ंगा डालने आदि की शिकायत करते हैं। उन्हें समूह का मनोविज्ञान समझने की जरूरत है कि यदि 10 में 9 लोग किसी एक दिशा में जा रहे हैं और 1 दूसरी दिशा में तो 9 लोग जिस चीज को सत्य समझते हैं, उनकी कोशिश रहेगी कि उस 1 को गलत दिशा में न जाने दें। चूँकि सत्य एक सापेक्षिक चीज है तो यह उस 1 की बहादुरी होगी कि अपने दिशा में कितने लंबे समय तक यात्रा जारी रख सकता है और साथ मे लोगों के मानस पर दस्तक देते रह सकता है (continuity & consistency)।  समय के साथ साथ 9 मे से धीरे धीरे कुछ लोग उस 1 की बात में यदि दम/merit देखेंगे तो रंग बदलना शुरू करेंगे। इस मैकेनिज्म को समझे बिना सिर्फ पैर खींचने या अड़ंगा डालने जैसी ही शिकायत की जा सकती है। of course, कुछ फैक्टर्स इस प्रक्रिया को तेज या धीमा कर सकते हैं


10. गप्प करना एक प्रभावकारी सामाजिक तरीका है जो बातों को फैलाता है, किसी की छवि धूमिल कर सकता है, किसी की अच्छी कर सकता है, संस्कृति का निर्माण करता है, संस्कार तय कर सकता है, किसी मुद्दे, विचारधारा, बात, इतिहास, संस्कृति, संस्कार, आचरण आदि के बारे में आम राय बनाता है। इसमे गप्प का मैटेरियल उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो जाता है। ज्यादातर यह engineered होता है, पर, आम जन इसको घटना के रूप में देखता, सुनता, चर्चा करता, अपनाता या छोड़ता है। 


धर्म, पाखण्ड आदि इसी तरीके से फैले। किसी बात को फैलाने के लिए बात को अनेकों प्लेटफार्म से अनेकों क्षेत्रों में लंबे समय के लिए (कम से कम 3 पीढ़ी/60-75 साल) चर्चा में रखना जरूरी है। इसके लिए सतत रूप से लोग, प्लेटफार्म और उस दिशा में सोचने वाले विचारक चाहिए, जिनके वृद्धि दर पर बात फैलना या सिमटना निर्भर करता है


11. यदि A, B की मदद करता है तो B ही मदद return करे, अभी समाज मे यह भावना है। B मदद लौटाने की परिस्थिति में नही भी हो सकता है और फिर A गप्प के माध्यम से न केवल B के बारे में बात फैलाता है बल्कि यह भी फैलाता है कि घोर कलयुग है, दूसरों की मदद करने का कोई फायदा नही है। यदि A, C  या D की मदद को भी अपने द्वारा की गई मदद की भरपाई माने तो आपसी सहयोग का सतत सिलसिला कायम किया जा सकता है। 


मानसिकता में यह अंतर किसी को मदद मिलने या देने की प्रायिकता/संभावना को घटा या बढ़ा सकता है। हालाँकि लेन देन में उच्च नीच हो सकता है। 


12. समाज के हर परिवार में किसी भी विधा का एक संस्कारक होना चाहिए


13. आस्था का विकेंद्रीकरण जरूरी है। आस्था का  केंद्रीकरण शोषण का हथियार है।


~ अनेकों विद्वान वक्ता


*देखिए* https://youtu.be/yb2vjCDue3A?si=_iCcWH00CQsmlt9m


*यूट्यूब2 पर पिछले बैठकों में विचारकों, समाजसुधारकों और संस्कारकों के उद्बोधन सुनने के लिए क्लिक करें* https://youtube.com/playlist?list=PL1ap5oFZycBOqlpUODvamqrjLhd9hrJTh&si=yj1a8qvj1zT-qSL4



Sunday, February 18, 2024

15वाँ निःशुल्क चिकित्सा शिविर

25 फरवरी, रविवार, 10 बजे से, प्राथमिक विद्यालय, मोकर

आँख जाँच फ्री

शिविर में डॉक्टर

1. डॉ नूतन कुमार सिंह, MBBS, जेनरल फिजिशियन

पता:- माँ वैष्णो एजेंसी, लालगंज, सासाराम

2. डॉ संदीप पटेल, MBBS, MS(ENT), कान, नाक, गला रोग एवं एलर्जी विशेषज्ञ

पता: गेट नंबर 2(सदर अस्पताल), रौजा रोड, सासाराम

3. डॉ पीयूष राजेश, MBBS, MS (Ortho), हड्डी, जोड़ एवं नस रोग विशेषज्ञ

पता: निदान केंद्र हॉस्पिटल, कचहरी पेट्रोल पंप के पीछे (पांडेय होटल के सामने), सासाराम

4. डॉ आलोक कुमार, BDS, MIDA (Delhi), दंत एवं मुख रोग विशेषज्ञ

पता:- शेरशाह रौजा रोड(अवतार डायग्नोस्टिक के बगल में), सासाराम

5. डॉ अनु कुमारी, MBBS, EMOC(PAT), स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ

पता:- शेरशाह रौजा रोड(अवतार डायग्नोस्टिक के बगल में), सासाराम





Sunday, February 11, 2024

न ब्राम्हण से न ब्राम्हणवाद से छुटकारा, ई0 राहुल पटेल, IITR,

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न ब्राम्हण से न ब्राम्हणवाद से छुटकारा, ई0 राहुल पटेल, IITR, 65वीं #PPSM बैठक P2
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1. Thinking fast, Thinking slow
2. फौरी तौर पर किसी बात को स्वीकार कर लेना या अस्वीकार कर देना एक आम समस्या है
3. लोगों का पूर्वाग्रह चीजों को नए सिरे से समझने में आड़े आता है
4. जानिए किसी मुहिम/मिशन/विचारधारा का gestation period क्या होता है?
5. लोगों को समाधान, एक वैकल्पिक रेडीमेड प्रोडक्ट के रूप में, उपलब्ध कराने पर ही आपके विचारधारा/मुहिम/समाधान की स्वीकार्यता बढ़ेगी
6. यह मिशन संस्कारकों, समाजसुधारकों और विचारकों को एक प्लेटफार्म पर लाकर सांस्कृतिक बदलाव लाना चाहता है
7. दोष देना समाधान नही है। समाधान/विकल्प बताये। उसकी उपयुक्तता, लंबी अवधि के संभावित परिणामों/प्रभावों पर बात करें
8. क्या लोगों को जागरूक किया जा सकता है?
9. आपकी पुरानी संस्कृति कितनी पुरानी? आपका पुराना, कितना पुराना?
10. यह मिशन पुरोहित उपलब्ध कराने के अलावा आपको समाज, संस्कृति, इतिहास पर विभिन्न दृष्टिकोण देता है
11. ब्राम्हणवादी व्यवस्था को स्थापित करने के मैकेनिज्म पर आम चर्चा हो
12. जिस तरह से बिना मछली से छुटकारा पाए मछली के गंध से छुटकारा पाने की बात करना हास्यास्पद है, उसीतरह से ब्राम्हण नही ब्राम्हणवाद की बात करने वाले भी अभी अँधेरे में हैं
13. ग्लास सीलिंग को समझिए
14. किसी मिशन, आंदोलन, संगठन की दिशा उसके कोर कमिटी में शामिल लोगों के बौद्धिक झुकाव, दृष्टिकोण से तय होती है

~ई0 राहुल पटेल, IITR


Thursday, February 8, 2024

संस्कृति में हस्तक्षेप का इस्तेमाल और मिशन की भूमिका

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संस्कृति में हस्तक्षेप का इस्तेमाल और मिशन की भूमिका, 65वीं बैठक P1 #PPSM
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1. पुरोहित/संस्कारक की जरूरत सभी जातियों को है और सभी जातियों से संस्कारक पैदा करने की जरूरत है
2. जानिए पुरोहित कौन है?
3. समाज को दिशा देने में संस्कृति की अति महत्वपूर्ण भूमिका है और उस संस्कृति को गढ़ने में हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए, इसपर विचार होना चाहिए
4. लोगों की मनोवृत्ति को समझकर अपनी बात रखना एक कला है
5. पुरोहिती में परंपरागत रूप से मौजूद अनपढ़, गँवार, ढोंगी, पाखण्डी, कामी लोगों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए संस्कारित लोगों को इसमे भरने की जरूरत है
6. व्यक्ति/सत्ता बदलने की बात करने वाले वर्षों की राजनीति करते हैं, जबकि सत्ता को समझने वाले, परिवर्त्तन करने वाले, हस्तक्षेप करने वाले सदियों की राजनीति करते हैं
7. Cultural momentum/सांस्कृतिक आवेग को कम किये बिना, cultural inertia/सांस्कृतिक जड़ता को तोड़ना संभव नही है
8. सामनेवाले को बेवकूफ समझना आपकी गलतफहमी है। उसकी बुद्धि को गरिमामयी मानते हुए अपनी बात रखने पर प्रतिकार की संभावना कम है
9. लोगों को समझाने के बजाय उनके सामने सवाल खड़ा करके हट जायें
10. जानिए संस्कृति क्या है और इसे समझना क्यों जरूरी है?
11. क्या करना है, कैसे करना है, कैसे विचार आते हैं, हमारी भावनाएँ किस रूप में व्यक्त होती हैं यह सब संस्कृति से निर्देशित होता है
12. सामाजिक कार्यकर्त्ता समाज को जीता है
13. समाज को समझिए
14. जानिए की आंदोलनों के अपहरण कैसे होता है?
15. संस्कृति में बदलाव, उसमे हस्तक्षेप करने का प्रभाव अति व्यापक है
16. अच्छे या बुरे काम के लिए लोगों के दिमाग पर पकड़ जरूरीहै, जिसके लिए सांस्कृतिक बदलावों के मैकेनिज्म को समझना अति महत्वपूर्ण है
17. सिद्धान्त की राजनीति करनेवाले राष्ट्र स्तर की राजनीति करते हैं, व्यक्ति आधारित राजनीति करने वाले सीमित क्षेत्र में सिमट जाते हैं
18. सत्य शाश्वत नही है, सापेक्षिक चीज है। यह व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि एक ही चीज का अर्थ अलग अलग लोग अलग अलग निकालते हैं और सभी स्वयं वाले को ही परम सत्य समझते हैं
19. Thinking fast, thinking slow, थोड़ा ठहर कर सोचिए, चीजें ज्यादा डिटेल में दिखेंगी
20. हर चीज का simple से complex की ओर उद्विकास होता है। यही evolution है
21. Sigmond Freud के id, ego, super ego को समझिए
22. जानिए भाषा की संरचना समझना क्यों जरूरी है?

- आचार्य निरंजन सिन्हा