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संस्कृति में हस्तक्षेप का इस्तेमाल और मिशन की भूमिका, 65वीं बैठक P1 #PPSM
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1. पुरोहित/संस्कारक की जरूरत सभी जातियों को है और सभी जातियों से संस्कारक पैदा करने की जरूरत है
2. जानिए पुरोहित कौन है?
3. समाज को दिशा देने में संस्कृति की अति महत्वपूर्ण भूमिका है और उस संस्कृति को गढ़ने में हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए, इसपर विचार होना चाहिए
4. लोगों की मनोवृत्ति को समझकर अपनी बात रखना एक कला है
5. पुरोहिती में परंपरागत रूप से मौजूद अनपढ़, गँवार, ढोंगी, पाखण्डी, कामी लोगों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए संस्कारित लोगों को इसमे भरने की जरूरत है
6. व्यक्ति/सत्ता बदलने की बात करने वाले वर्षों की राजनीति करते हैं, जबकि सत्ता को समझने वाले, परिवर्त्तन करने वाले, हस्तक्षेप करने वाले सदियों की राजनीति करते हैं
7. Cultural momentum/सांस्कृतिक आवेग को कम किये बिना, cultural inertia/सांस्कृतिक जड़ता को तोड़ना संभव नही है
8. सामनेवाले को बेवकूफ समझना आपकी गलतफहमी है। उसकी बुद्धि को गरिमामयी मानते हुए अपनी बात रखने पर प्रतिकार की संभावना कम है
9. लोगों को समझाने के बजाय उनके सामने सवाल खड़ा करके हट जायें
10. जानिए संस्कृति क्या है और इसे समझना क्यों जरूरी है?
11. क्या करना है, कैसे करना है, कैसे विचार आते हैं, हमारी भावनाएँ किस रूप में व्यक्त होती हैं यह सब संस्कृति से निर्देशित होता है
12. सामाजिक कार्यकर्त्ता समाज को जीता है
13. समाज को समझिए
14. जानिए की आंदोलनों के अपहरण कैसे होता है?
15. संस्कृति में बदलाव, उसमे हस्तक्षेप करने का प्रभाव अति व्यापक है
16. अच्छे या बुरे काम के लिए लोगों के दिमाग पर पकड़ जरूरीहै, जिसके लिए सांस्कृतिक बदलावों के मैकेनिज्म को समझना अति महत्वपूर्ण है
17. सिद्धान्त की राजनीति करनेवाले राष्ट्र स्तर की राजनीति करते हैं, व्यक्ति आधारित राजनीति करने वाले सीमित क्षेत्र में सिमट जाते हैं
18. सत्य शाश्वत नही है, सापेक्षिक चीज है। यह व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि एक ही चीज का अर्थ अलग अलग लोग अलग अलग निकालते हैं और सभी स्वयं वाले को ही परम सत्य समझते हैं
19. Thinking fast, thinking slow, थोड़ा ठहर कर सोचिए, चीजें ज्यादा डिटेल में दिखेंगी
20. हर चीज का simple से complex की ओर उद्विकास होता है। यही evolution है
21. Sigmond Freud के id, ego, super ego को समझिए
22. जानिए भाषा की संरचना समझना क्यों जरूरी है?
- आचार्य निरंजन सिन्हा
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