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दर्ज़ी का काम एक बहुत बड़ा आर्ट है।
भारत में इस आर्ट को मुसलमानों ने अपने उरूज पर पहुँचाया। 'सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा...' लिखने वाले कवि अल्लामा इक़बाल जो कश्मीरी पंडित थे, उनके वालिद भी दर्ज़ी का काम किया करते थे।
काश्मीर में पंडित कहाँ से आये? 'सारे जहाँ से अच्छा...' कविता में इक़बाल लिखते हैं:-
"ऐ आब-रूद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझ को
उतरा तिरे किनारे जब कारवाँ हमारा"
ये लोग चटगाँव पोर्ट से आने वाले पूरबिया लोग थे। इंडोनेशिया आपकी नजर में मुस्लिम देश होगा, पर, वे गणेश, रामायण आदि को अपनी संस्कृति मानते हैं। हिन्दू मुस्लिम आप जैसे 200 साल पुराने हिंदुओं के लिए भावनात्मक बातें होंगी, उनके लिए इन दोनों में तारतम्यता है। ये पंडित बंगाल से चलकर कश्मीर तक कैसे चले गए? द ग्रेट त्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे के दौरान भारतीय भौगोलिक क्षेत्रों में अँग्रेजों को वैसे लोगों की जरूरत थी जो स्वयं ही रूटलेस हों। अँग्रेज ऐसे लोगों को स्थानीय जासूस, कुली, नौकर, खानसामा, कर्मचारी यानी हर तरह से रोजगार देते थे। स्थानीय कबीले अँग्रेजों के मनमाफिक नहीं थे। इसतरह से दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों से आये ये लोग अँग्रेजों के साथ पूरे भारत में फैले। जो जाति समूह पूरे देश में हर जगह हर गाँव में मिलते हैं, वे सभी दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों से आये लोग हैं। अन्य कबीलाई बिरादरियाँ पॉकेट्स में मिलती है।
काश्मीर से पंडितों को भगाए जाने, इनको केन्द्र सरकार द्वारा वापस काश्मीर में बसने का विकल्प देने पर भी इनका वहाँ वापस न जाना इनके वहाँ के बाशिंदा नहीं होने की ओर इशारा करता है। इन्हें रुपया से मतलब है। काश्मीर से भागकर आने के बाद पंडितों द्वारा चालित सरकार ने इन्हें दिल्ली में शरणार्थी के तौर पर बसाया। तर्क यह था कि ये लोग काश्मीर वापस चले जायेंगे। लेकिन दिल्ली से बाकी लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाकर वापस भेजा जा रहा है, वैसा बर्त्ताव काश्मीरी पंडितों के साथ नहीं किया जा सकता। ये दामाद हैं। ये जिस तरह से दिल्ली के जमीन और व्यवसाय पर काबिज हो गए हैं, छोड़कर वापस काश्मीर वापस भी नहीं जायेंगे। अब तो सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए काश्मीर के रियल एस्टेट में भी इनका हिस्सा है।
खैर आपका ध्यान काश्मीरी पंडितों की ओर दिलाना नहीं था, पंडितों के मूल देश की ओर दिलाना था। हाँ, इनमें हर रंग रूप, कद काठी के लोग मिलना यह बताता है कि जब एक समूह दूसरे समूह(अँग्रेज) के साथ पराश्रित की तरह रहता आया हो तो डिक्शनरी चाइल्ड वाली परिस्थिति पैदा होना लाजिमी है।
~ राहुल पटेल
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