#समाज #स्वास्थ्य
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आपने भी अबतक covid19 का वैक्सीन बनाने वाली अस्ट्रोजेनेका कंपनी के स्वीकारोक्ति को पढ़ लिया होगा, जहाँ उन्होंने कोविशिल्ड (भारत मे 80% लोगों ने लिया है, हो सकता है कि आप भी हों) से
- खून के थक्का बनने
- खून में निम्न प्लेटलेट्स
- टीटीएस
जैसे शारीरिक समस्या का उत्पन्न होना स्वीकारा है और अब उनपर यूके उच्च न्यायालय में हर्जाना के दावे ठोके जा रहे हैं। ये हर्जाना कंपनी नही देगी, सरकार देगी। सरकार भरपाई कैसे करेगी तो टैक्स बढ़ाकर। सीधा मतलब है चीजों का दाम बढ़ाकर कंपनी की गलतियों का हर्जाना भरा जाएगा।
https://www.bmj.com/content/380/bmj.p725
महत्वपूर्ण यह भी है कि उस वैक्सीन को विकसित करने में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं का भी हाथ था। शोध की गुणवत्ता बरकरार रखना केवल ऑक्सफ़ोर्ड की जिम्मेवारी तो है नही। इसलिए वैक्सीन के निर्माण और वितरण के पहले ही ब्रिटिश सरकार ने निर्माताओं को हर जवाबदेही से मुक्त कर दिया था। भारत ठहरा विश्व गुरु। मोदी सरकार ने वैक्सीन के भारत मे निर्माण होने (अस्ट्रोजेनेका का माल सीरम संस्थान में बनता था) का पूरा डंका पिटवाया। जब विश्व गुरु के भी गुरु की तरफ से सब ओके है तो भला विश्व गुरु की क्या औकात कि वैक्सीन पर सवाल खड़ा करे!
भारत मे मोदी सरकार ने न्यायालय में यह पहले ही हलफनामा दायर कर दिया है कि कोविड वैक्सीन वैकल्पिक था। लोग स्वयं कूद कूद कर वैक्सीन लेने जाते थे। किसी ने उन्हें सरकारी सुविधाओं जैसे राशन कार्ड से नाम काटने या सरकारी कार्यालयों, पब्लिक परिवहनों में आने जाने के लिए वैक्सीन सर्टिफिकेट का भय नही दिखाया था। ग्रामीण जनता को वैक्सीन सेंटर तक पहुँचाने में मास मीडिया का सरकार ने कोई इस्तेमाल नही किया था।
भारत मे 2022 में 56,653 अचानक मौतें दर्ज की गई थीं। दर्ज नही किये जाने वाले केस अनुमान की बात है। हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या में 2021 की तुलना में 2022 में 12.5% का उछाल आया। 2023 का आँकड़ा मिला नही। https://theprint.in/health/marked-rise-in-sudden-deaths-heart-attacks-in-2022-shows-ncrb-data/1873004/
अकेले गुजरात मे 2022 की तुलना में 2023 में बढ़ती जनसंख्या को अध्ययन में शामिल करने के बाद भी 29% का उछाल आया।
https://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/gujarat-cardiac-crisis-at-record-high-emri-got-1-call-every-7-5-minutes-in-2023/amp_articleshow/106500114.cms
केवल 6 महीने के अंदर जुलाई से दिसंबर के बीच मे गुजरात में हुई हार्ट अटैक से 1052 अचानक मौतों में 80% लोग 11-25 साल की उम्र के थे। https://www.google.com/amp/s/www.thehindu.com/news/national/other-states/over-1000-died-of-heart-attack-in-six-months-gujarat-minister/article67597167.ece/amp/
47 tertiary सुविधा वाले अस्पतालों से 18-45 साल के एकदम स्वस्थ, पर कोविड वैक्सीन लिए 29,171 व्यक्तियों के अचानक अकारण मृत्यु वाले दर्ज केसों का अध्ययन कर ICMR ने यह पाया कि ये लोग कोविड वैक्सीन के चलते नही बल्कि दारू, अधिक कसरत, उनके घरों में ऐसी मौतों के पहले होने(शायद अचानक मरने की जेनेटिक आदत की ओर इशारा हो) आदि के कारण हो सकते हैं। गनीमत है कि कारणों में खुशी से अचानक मृत्यु को नही गिनाया गया। ब्रिटेन को उच्च न्यायालय में अपना केस लड़ने के लिए ICMR जैसे किसी तीसरी दुनिया के देश के संस्थान की रिपोर्ट इस्तेमाल करनी चाहिए। https://factly.in/review-what-did-the-icmr-study-on-factors-associated-with-unexplained-sudden-deaths-among-adults-in-india-find/
अब कोविशिल्ड के साइड इफ़ेक्ट के पूरे प्रकरण को यह मोड़ दिया जा रहा है कि इससे अत्यंत दुर्लभ रोग TTS हो सकता है, लेकिन कोविशिल्ड के दूसरे साइड इफ़ेक्ट यानी खून में निम्न प्लेटलेट्स स्तर का भारत का आँकड़ा यदि किसी के पास उपलब्ध हो तो जरूर दें। मैंने अपने छोटे से शहर सासाराम बिहार में पिछले 2-3 साल में इसमें जबरदस्त उछाल देखा है। टेस्ट में टाइफाइड के लक्षण आ रहे हैं। 2023 में भारत मे टाइफाइड के मामलों में 30% का उछाल आया है। सभी मामलों में अत्यंत कम प्लेटलेट्स की समस्या है। इलाज किया जा रहा है टाइफाइड का।
आपका ध्यान मैं इस ओर बटाना चाहता हूँ कि कोविशिल्ड से उत्पन्न इस समस्या से जूझते करोड़ो भारतीयों का 3-5000/- लुढ़कना खरबों रुपये का आर्थिक बोझ है, जिसे आम भारतीय अपने ऊपर झेल रहा है। लेकिन मोदी सरकार हो या ICMR, सब चंगा सी!
कम प्लेटलेट्स की समस्या पूरी दुनिया मे मौजूद हो सकती है ओर इसका कारण कोविशिल्ड हो सकता है। इसकी भरपाई कौन करेगा? इस प्रभाव की व्यापकता पर शोध कौन करेगा? अभी कोवैक्सीन के दुष्परिणाम पर शोध बाकी है।
~ राहुल पटेल
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