#समाज #स्वास्थ्य
कोविशिल्ड के कारण भारत मे हो रही अचानक मौतों और सबसे व्यापक स्तर पर प्लेटलेट्स कम होने की शिकायतों के संदर्भ में मोदी सरकार की सबसे जबरदस्त हिट स्कीम "पीएम मोदी #चंदा_दो_धंधा_लो स्कीम" के तहत कुछ वैसी दवा कंपनियाँ, जिनकी वे दवाईयाँ जो ड्रग टेस्ट फैल कर चुकी हैं, जो आपका तथाकथित रूप से बीपी, हार्ट अटैक, खून पतला करना, वायरस, फंगस आदि रोकने का काम कर रही है, बड़े मजे से भाजपा को चंदा देकर पाक साफ हो जा रही है। 35 दवा कंपनियों ने भाजपा को कुल 1000 करोड़ का चुनावी चंदा दिया है। इन कंपनियों की ऊर्जा दवाओं की गुणवत्ता बरकरार रखने की बजाय मोदी और भाजपा को सत्ता में लाने में ज्यादा जा रही हैं। भाजपा की नजर में आपके जान की कीमत आपके वोट तक ही है।
https://amp.scroll.in/article/1065318/seven-firms-that-failed-drug-quality-test-gave-money-to-political-parties-through-electoral-bonds
1. हेटेरो लैब्स और हेटेरो हेल्थकेयर ने 60 करोड़ का भाजपा से चुनावी बांड खरीदा। इसकी तीन रेमडेजीवीर की दवाईयाँ(एन्टी वायरस की दवाईयाँ) जो कोविड 19 के उपचार में, itbor कैप्सूल (एन्टी फंगल दवाई) तथा मोनोसेफ (एन्टी बैक्टीरियल दवाई) ड्रग टेस्ट फेल हो चुकी हैं, पर, मार्केट में इनपर कोई रोकटोक नही है
2. टोरेंट फार्मा ने 77.5 करोड़ का भाजपा को चुनावी चंदा दिया। इसकी खून के थक्का जमने(जो अचानक अकारण हार्ट अटैक के मुख्य कारक के रूप में सामने आए हैं) से रोकने वाली दवाई Deplatt 150, BP कम करने की दवाई Losar H, हृदय के रोगों की दवाई Nicoran LV, डायरिया की दवा Lopamide मॉलिक्यूल्स की दवा ड्रग टेस्ट फेल होने के बावजूद मार्केट में उपलब्ध हैं
3. Zydus हेल्थकेयर ने 29 करोड़ का चंदा दिया। इसकी कोविड 19 की दवा रेमडीजीवीर दवाईयाँ ड्रग टेस्ट फेल कर चुकी हैं, पर, मार्केट में उपलब्ध हैं
4. Glenmark ने 9.75 करोड़ चंदा दिया है। इसका BP, हार्ट अटैक की दवा telma ड्रग टेस्ट फेल है, मार्केट में उपलब्ध है
5. Cipla ने 39.2 करोड़ भाजपा को चंदा दिया है। इसका RC कफ सिरप तथा रेमडीजीवीर की दवा Cipremi ड्रग टेस्ट फेल हैं, पर, मार्केट में हैं
6. IPCA LABORARTIES ने 13.5 करोड़ का चुनावी चंदा दिया है। इसका एन्टी parasitic दवा Lariago ड्रग टेस्ट फेल है, पर, मार्केट में बिक रहा है
7. Intas फार्मास्यूटिकल ने 20 करोड़ दिया और इसका दवा BP, हार्ट अटैक की दवा Enapril-5 ड्रग टेस्ट फेल है, बिक रहा है।
इससे भी खतरनाक यह बात है कि ये कंपनियाँ मोदी सरकार की मेडिकल पालिसी निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं यानी भेड़ियों को, पैसा लेकर, भेड़ों को किस तरह से काटा जाए, का कानून बनाने की भूमिका दी जा रही है।
यह मत समझियेगा या पालिसी निर्धारण में पैसा लेकर निजी कंपनियों को भूमिका देना केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में है। यह शिक्षा, श्रम, कृषि, माइनिंग आदि सभी क्षेत्रों में है। इसे कहते हैं धनतंत्र/plutocracy। अंतर सिर्फ इतना है कि पैसा अपरोक्ष रूप से आप ही का है। है, न , मजेदार बात!
~राहुल पटेल
No comments:
Post a Comment