आदिकिसान द्वारा रखे गए भारतीय इतिहास के तथ्यों को मेरे द्वारा एक जगह संकलित और वर्गीकृत करने के चलते यह संभव हो पाया कि एक प्रो0 साहब के बात का मैं आसानी से जवाब दे सका। यदि आप भी इस समूह से जुड़ना चाहते हैं तो मेरे द्वारा उपलब्ध कराए गए लिंक पर क्लिक कर जुड़ सकते हैं।
प्रसंग यह है कि एक दूसरे विद्वान व्यक्ति का मेरे द्वारा बात रखने पर इन्होंने शंका जताई।
हालाँकि यह 'भारत प्रवेश' की बजाय 'इतिहास प्रवेश' था।इसपर मैंने तुरंत उस किताब की पीडीएफ डाउनलोड की। पहले प्रकरण में भारत की चौहद्दी का वर्णन था। अगले प्रकरण से लेखक ने अपनी विद्वता का परिचय देना शुरू किया। इस प्रकरण के पहले पन्ने पर ही महाभारत का जिक्र था। बस फिर क्या था? मेरे पास आदिकिसान साथियों द्वारा प्रस्तुत सारे प्रमाण मौजूद थे ही। पहले आप जयचंद्र जी जैसे इतिहासकार की बात पढिये।
यह पन्ना फारवर्ड करते हुए प्रो0 साहब को मैंने निम्न जवाब भेजा:-
सर, पुस्तक का एक उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ। लेखक ने महाभारत का जिक्र किया। अब कुछ साक्ष्यों
पर गौर कीजिए:
1. 1972 में वर्त्तमान भारत के थानेसर का नाम वर्ण व्यवस्था वालों ने कुरुक्षेत्र रखा
2. फुनान साम्राज्य जो वर्तमान में कंबोडिया है पहली सदी में वर्तमान के दक्षिणी लाओस तक फैला हुआ था और उपलब्ध साक्ष्यों में इस भूभाग का जो फुनान प्रान्त का हिस्सा था उसका नाम कुरुक्षेत्र था | इसी भूभाग से मिले दुसरे साक्ष्य से पता चलता है की उस भूभाग का नाम कश्यपद्वीप कर दिया गया। कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया गया था।UNESCO के अनुसार 5वीं सदी में लाओस में कुरुक्षेत्र तीरथ/ज़िले के उल्लेख वाला शिलालेख मिला है
3. इंडोनेशिया में मूल रूप से पाँच बारत हैं। जिनको एक करने के लिए यानी महाबारत बनाने के लिए कूटनीति और युद्ध से कई प्रयास हुए। Britannia उर्फ़ बरतानिया का भारत उर्फ़ बारत मूल रूप से इंडोनेशिया में है। यह देखिये:
1) सुमातेरा बारत उर्फ़ सुमात्रा बारत,
2) जावा बारत,
3) कालिमंतन बारत,
4) नुसा टेंग्गरा बारत,
5) सुलावेसी बारत,
6) इरियन जया बारत उर्फ़ पापुआ बारत (यह अलग है)
India नाम ब्रिटिशर्स अंग्रेजो ने नहीं बल्कि रोमनों ने लिखा था। कथित रूप से Indica ईसा पूर्व सिकंदर के समय लिखा गया था। लेकिन रोमनो ने जिस भूभाग को इंडिया/इंडिका कहा और लिखा था वो ये था
यूरोपियन लोग आज के भारत को दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बाद में ही जाने और सिल्क ट्रेड रूट होते हुए चीन साइड से दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में बहुत पहले आ चुके थे। 6 ईस्ट इंडिया कंपनी थी। इनकी वेस्ट इंडिया कंपनियाँ भी थीं। इनके लिए कई इंडिया थें। इन सभी की शुरुवात आज के इंडिया आने से बहुत पहले दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में हो चुकी थी। मुख्यतः मसाले और रत्न का व्यापार था।थाईलैंड वैश्यावृति का अड्डा था, आज भी है। यूरोपियन उन क्षेत्रों को इंडिया समझते थे। अभी आज का इंडिया का नाम इंडिया पड़ा भी नही था।
धूर्त इतिहासकारों ने भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ना बताया। भारत जैन तीर्थंकर के पुत्र थे और पहले 5 तीर्थंकर इंडोनेशिया में हुए। वैसे भी भरत पुरुष के नाम पर भारत माता के बनने की कहानी भी जान ही लीजिए। तीसरे सदी का यह सिक्का फुनेशियन "बारत" लोगों का है, जिसमें उनके संरक्षण की "देवी बारती" को "ब्रिटानिया" रूप में दर्शाया गया है
यही ब्रिटानिया/बरतानिया श्री मती भारेतश्वरी उर्फ बारत माता है।
तो अब आप जानते हैं कि संविधान में वर्णित 'India that is Bharat' कहाँ से आया। यह महज 1950 का सौदा है और अधिकांश संविधान निर्माताओं के थाईलैंड, इंडोनेशिया से संबंध के आदिकिसान के दावे को अंडरलाइन करता है। यह उल्लेखनीय है कि यदि आप यह सोच रहे हैं कि तब इस देश का नाम हिंदुस्तान ठीक है तो जान लीजिए कि डच ईस्ट इंडिया कंपनी का एशिया के इंडोनेशिया में पहला व्यापारिक प्रतिष्ठान था और यह belanda hindia कहलाता था। स्वर्णभूमि, जम्बूद्वीप सब इंडोनेशियाई क्षेत्र को ही कहते हैं। ये स्वयं को आर्यपुत्र कहते थे/हैं (महाभारत में कई जगह जिक्र है) और आर्यवर्त नाम इनका यूरोपियन लोगों से थाईलैंडी धंधे की पैदाइश की ओर इशारा करता है। अब आप यह भी जानते हैं कि ये वर्ण व्यवस्था वाले क्यों अपने फादरलैंड यानी पश्चिम की ओर इशारा करते हैं। इनका DNA विश्लेषण भी यही कहता है। ये आज भी स्वयं को आर्यपुत्र कहते हैं।
4. Novel variety of gold powder known as Pipīilika or Ants' gold as described in the great epic Mahābhārata has also been discussed. जावा सुमात्रा द्वीपों में ज्वालामुखी से निकले सोना के इस तरह के कण नदियों और किनारे आज भी मिलते हैं
5. भारत मे महाभारत के जिन दृश्यों का वर्णन केवल सिर्फ किताबों में मिलता है, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में यह सब मूर्त्तियों में भी हैं
6. मेरे एक विद्यार्थी ने एक बार मुझसे कहा कि कुरुक्षेत्र की मिट्टी खून से आज भी लाल है। यह कहानी मैंने पहले भी एक बार ट्रेन में किसी से सुनी थी। मैंने विद्यार्थी को समझाया कि यदि वह खून रहता तो जीवाणु उसको एक सप्ताह या महीना में अब तक चट कर चुके होते, जबकि तुम 5000 साल की बात कर रहे हो। यह बात उसके दिमाग में एकदम से क्लिक कर गई। मैंने उसे समझाया कि वहाँ की मिट्टी लेटराइट मिट्टी है।
आप देख सकते हैं कि पूरी पुस्तक के केवल एक पन्ने से मैंने प्रसंग उठाया है। इस लेखक को मैं पन्ना दर पन्ना ध्वस्त कर सकता हूँ। यह लेखक कोई इतिहासकार नही है। महज पहले से लिखी झूठी lopsided इतिहास की किताबों को नए तरीके से इसने लिखा है।
यह मेरा जवाब था।
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यदि आप अन्य विचारधारा के हैं तो हमलोगों द्वारा दिये साक्ष्यों पर गौर करें।
अंत मे:











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